Poem – नये साल की खूब बधाईयां, मनाए आज ढेर खुशियां

नये साल की खूब बधाईयां
मनाए आज ढेर खुशियां

पुरानी बातों को देकर विदाई, नये आशाओं की करे बधाई
नव वर्ष में बनाये नया जीवन, सुख-शान्ति-प्रेम से भरा हो अन्तरमन
श्रेष्ठ कर्मों द्वारा मिटाए सबकी परेशानीयां
(नये साल की खूब बधाईयां, मनाए आज ढेर खुशियां)

सजाये स्वयं को दिव्यगुणों के श्रृंगार, करे सभी का धन्यवाद
मनाये सबसे मंगल मिलन, दे शुभ भावनाओं की सौगात
सफलता की पाए सब ऊँचाइयां
(नये साल की खूब बधाईयां, मनाए आज ढेर खुशियां)

ज्ञान-अमृत से होके लवलीन, बांटे सबको दिलखुश मिठाई
खेले ईश्वर संग सर्व-सम्बंधों की रास, गाए प्रभु के दिव्य गुणगान
नव युग की धारण करे दिव्यता
(नये साल की खूब बधाईयां, मनाए आज ढेर खुशियां)

Poem – संतोष सबसे बड़ा है धन

Poem – संतोष सबसे बड़ा है धन

पायी सन्तुष्टता की सर्वश्रेष्ठ पूँजी, जो है सर्व दिव्यगुणों की कुंजी
संतोष सबसे बड़ा है धन, जो तृप्त कर देता अन्तर्मन

सन्तुष्टता से आती प्रसन्नता, सदा वो रहता मुस्कराता
उसका दिल सदा गाता गीत, बनता वह सबका मीत
जिसकी दिव्य सुगंध से महक उठा मन उपवन
(संतोष सबसे बड़ा है धन, जो तृप्त कर देता अन्तर्मन)

संतोष गुण है सबसे मनभावन, बरसाता सबपे सुख सावन
सन्तुष्टता ऐसी है शक्ति, सर्व बातों को जो सहज कर सकती
जिससे आती वाणी में मधुरता, दिव्य बनते हर कर्म
(संतोष सबसे बड़ा है धन, जो तृप्त कर देता अन्तर्मन)

सर्व प्राप्तियों से आती सन्तुष्टता, जिसके लिए जोड़े प्रभु से मित्रता
पाए उनसे सर्व सम्बंधों का सुख, सीखे कैसे रहें सदा खुश
ईश्वरीय ज्ञानयोग से बना मन सुमन, शुद्ध संकल्पों में करता अब रमण
(संतोष सबसे बड़ा है धन, जो तृप्त कर देता अन्तर्मन)


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Poem – दिव्यगुणों से सजाकर बनाया बेहद हसीन

Poem – दिव्यगुणों से सजाकर बनाया बेहद हसीन

ओ मेरे प्रभु
इस विश्व-नाटक में बनाया हमें हीरो-हीरोइन
दिव्यगुणों से सजाकर बनाया बेहद हसीन

दृष्टि में है सौम्यता, वाणी में मधुरता; कर्म में दिव्यता, व्यवहार में रॉयल्टी
वृत्ति बनाकर विशाल, संकल्प किये उदार; सम्बन्ध बने मीठे, सम्पर्क में आई सन्तुष्टी
इत्र सा चरित्र महकाकर, खिलाया हमें रूहानी कली
(दिव्यगुणों से सजाकर बनाया बेहद हसीन… इस विश्व-नाटक में बनाया हमें हीरो-हीरोइन)

दिव्य स्मृति से बनी खुशनुमः स्थिति; चेहरा है हर्षित, चलन अलौकिक
समझ की गहराई ने बनाया रहमदिल; मन है सुगंधित, दिव्य है बुद्धि
रूहानी जादूगर ने गुण-शक्तियों की ऐसी करी जादूगरी
(दिव्यगुणों से सजाकर बनाया बेहद हसीन… इस विश्व-नाटक में बनाया हमें हीरो-हीरोइन)

संस्कारों के परिवर्तन ने बनाया, फरिश्ता वा परियों सा वर्तन
आत्मरियलाइजेशन ने किया पवित्रता-सुख-शान्ति सम्पन्न
अपनी किस्मत के क्या कहने, स्वयं भगवान् बना जीवन साथी
(दिव्यगुणों से सजाकर बनाया बेहद हसीन… इस विश्व-नाटक में बनाया हमें हीरो-हीरोइन)


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How to overcome Ego | 5 Thoughts for overcoming Ego

How to overcome Ego | 5 Thoughts for overcoming Ego

Ego is one of the major reasons of conflict & disharmony… Hence let’s overcome Ego, by remembering thoughts like:

  • Any success is a result of 2 factors – Personal efforts & Nature’s gifts (incl. support of others)… Focusing on gratitude for these gifts keeps us egoless
    • Indeed, we’re unique … Many are yearning for the naturally gifted skills & talents we possess!
  • Ego is fuelled by looking at defects in others… Hence, a strong practice of looking at specialities & giving good wishes finishes Ego!
  • The virtues of unity, co-operation & teamwork are the antidote to ego
  • Remaining in the awareness of being God’s child (or God’s instrument!) naturally keeps us egoless
  • We know what we were before, & all that we have become now is only because of the knowledge & senior’s help… Hence, Ego is actually never possible!

Conclusion (How to overcome Ego)

Hence, let’s inculcate self-respect which instantly finishes Ego… And keep sharing love & respect with all, helping create a happier new world!


Let’s also learn how to overcome Expectations, Desires, Comparison, Competition, Hurry, Hurt, Jealousy, Guilt, Addictions, Anger, Greed & Fear

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